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Faridabad News: फरीदाबाद की रहने वाली पदमा दास पिछले करीब 40 सालों से मां काली की प्रतिमाएं बना रही हैं. उनकी बनाई प्रतिमाओं की मांग सिर्फ फरीदाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान और गुरुग्राम से भी लोग ऑर्डर देने पहुंचते हैं.
फरीदाबाद: कहते हैं कि हुनर की कोई सीमा नहीं होती, कलाकार जहां भी जाता है, अपनी कला से अपनी अलग पहचान बना लेता है. ऐसा ही कुछ फरीदाबाद में देखने को मिल रहा है, जहां बंगाल की रहने वाली पदमा दास पिछले करीब 40 सालों से मां काली की प्रतिमाएं बना रही हैं. उनकी बनाई प्रतिमाओं की मांग सिर्फ फरीदाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान और गुरुग्राम से भी लोग ऑर्डर देने पहुंचते हैं. इस बार दिवाली पर उनके पास मां काली की 40 प्रतिमाओं के ऑर्डर आए हैं. खास बात यह है कि फरीदाबाद में मां काली की प्रतिमाएं बनाने वाले चुनिंदा कलाकारों में उनका नाम शामिल है.
लोकल18 से बातचीत में पदमा दास बताती हैं कि मैं मूल रूप से बंगाल की रहने वाली हूं. मैं पिछले करीब 40 सालों से फरीदाबाद में रह रही हूं और इतने ही समय से यहां मां काली की प्रतिमाएं बनाने का काम कर रही हूं. इस बार हमारे पास करीब 40 प्रतिमाओं के ऑर्डर आए हैं. इनमें छोटी प्रतिमाओं से लेकर बड़ी मूर्तियां शामिल हैं. इनका साइज ढाई फुट से शुरू होकर छह से 7 फुट तक है. छोटी प्रतिमा की कीमत करीब 7 से 8 हजार रुपये है, जबकि बड़ी प्रतिमाओं की कीमत 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. कुछ प्रतिमाओं की कीमत 15 से 20 हजार रुपये के बीच है.
रंगाई और सजावट का काम
उन्होंने कहा कि मैं अपने पति और कारीगरों के साथ मिलकर ये प्रतिमाएं तैयार करती हूं. इस बार हमारे साथ 10 से 15 कारीगर काम कर रहे हैं. इनमें ज्यादातर बंगाल के रहने वाले हैं. मां काली की प्रतिमा बनाने में चार से पांच तरह की मिट्टी का इस्तेमाल होता है. इसमें रेत, सामान्य मिट्टी और चिकनी मिट्टी शामिल होती है. इन मिट्टियों को कई बार तैयार करके प्रतिमा का आकार दिया जाता है. इसके बाद रंगाई और सजावट का काम होता है.
ऑर्डर के हिसाब से बन रहीं प्रतिमाएं
पदमा बताती हैं कि मां काली की प्रतिमा बनाने का काम दुर्गा पूजा के समय से ही शुरू हो जाता है. हमें करीब 15 से 20 दिन का समय मिलता है, जबकि कुछ तैयारियां पहले से चलती रहती हैं. इस समय ज्यादातर प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं. अब केवल मुकुट, बाल और दूसरे साज-सज्जा के सामान लगाने का काम बाकी है. मैंने इस बार सभी प्रतिमाएं ऑर्डर के हिसाब से बनाई हैं.
फरीदाबाद में भी कई जगहों पर काली पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. इसी वजह से यहां प्रतिमाओं की अच्छी मांग रहती है. इस साल कारोबार भी पिछले साल के मुकाबले काफी अच्छा रहा है. सामान के दाम बढ़ने के बावजूद अच्छे ऑर्डर मिले हैं. मुझे खुशी है कि हमारी बनाई मां काली की प्रतिमाएं अलग-अलग जगहों पर पूजा के लिए भेजी जा रही हैं.













