Last Updated:
Ambala Inspiring Story : सिविल हॉस्पिटल अंबाला की लैब में छह ऐसे युवा काम रहे हैं, जो न सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं. बावजूद उनका काम देखते ही बनता है. अस्पताल का पूरा स्टाफ उनकी तारीफ करते नहीं थकता. आकाश, बबनदीप, भूमिका, नीरा, सिमरन और योगेश्वरी एक वर्षीय डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग लेने यहां आए हैं. ये छात्र ब्लड सैंपलिंग, नमूनों का संग्रह, उनकी लेबलिंग और पंजीकरण, जांच के लिए नमूनों की तैयारी और जांच प्रक्रियाओं में सहयोग करते हैं. लैब स्टाफ ने भी इनके साथ काम करने का ऐसा तालमेल बना लिया है कि अब संवाद की कमी महसूस नहीं होती. इनका आत्मविश्वास, मुस्कुराता व्यवहार और काम में दिखाई देने वाली सटीकता मरीजों की झिझक खत्म कर देती है.
अंबाला. अस्पताल की पैथोलॉजी लैब, जहां हर दिन सैकड़ों जांचें होती हैं और हर रिपोर्ट किसी मरीज के इलाज की दिशा तय करती है. इसी लैब में छह ऐसे युवा अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जो न सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं. इसके बावजूद उनके काम में ऐसी सटीकता है कि मरीज ही नहीं, अस्पताल का पूरा स्टाफ भी उनकी तारीफ करते नहीं थकता. अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की यह तस्वीर न केवल प्रेरित करती है, बल्कि समाज की उस सोच को भी बदल रही है, जो दिव्यांगता को कमजोरी मानती है. नागरिक अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में महाज्ञानी ऋषि अष्टावक्र केंद्र, गवर्नमेंट पॉलीक्लिनिक सेक्टर-26 पंचकूला से आए छह मूक-बधिर छात्र—आकाश, बबनदीप, भूमिका, नीरा, सिमरन और योगेश्वरी एक वर्षीय डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी) का प्रशिक्षण ले रहे हैं.
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए वरदान
इससे पहले भी यह लैब कई दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार की राह दिखा चुकी है. अब यह नया बैच उसी भरोसे को आगे बढ़ा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान ये छात्र ब्लड सैंपलिंग, जैविक नमूनों का संग्रह, उनकी लेबलिंग और पंजीकरण, जांच के लिए नमूनों की तैयारी और लैब टेक्नीशियनों के निर्देशन में जांच प्रक्रियाओं में सहयोग कर रहे हैं. संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, उपकरणों की साफ-सफाई और गुणवत्ता मानकों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण ले रहे हैं. चिकित्सा क्षेत्र में जहां हर प्रक्रिया में सटीकता सबसे बड़ी जरूरत होती है, वहां इन छात्रों का अनुशासन और एकाग्रता लोगों का ध्यान खींच रही है.
कैसे करते हैं बातचीत
दिलचस्प बात यह है कि जहां लैब में सामान्य तौर पर लगातार बातचीत और निर्देशों का आदान-प्रदान होता है, ये छात्र केवल सांकेतिक भाषा, चेहरे के हाव-भाव और आपसी तालमेल से पूरा काम संभाल लेते हैं. धीरे-धीरे लैब स्टाफ ने भी इनके साथ काम करने का ऐसा तालमेल बना लिया है कि अब संवाद की कमी कभी महसूस नहीं होती. शुरुआत में कई मरीज यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि उनका सैंपल लेने वाला प्रशिक्षु न सुन सकता है और न ही बोल सकता है. हालांकि कुछ ही देर में इनका आत्मविश्वास, मुस्कुराता व्यवहार और काम में दिखाई देने वाली सटीकता मरीजों की झिझक खत्म कर देती है. सावधानीपूर्वक सैंपलिंग और जिम्मेदारी के साथ किया गया काम मरीजों का भरोसा जीत लेता है.
क्या बोले डॉक्टर
नागरिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. जितेंद्र ढिल्लो लोकल 18 से बताते हैं कि सभी छात्र एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए यहां आए हैं. सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए इनके साथ हमेशा एक अन्य प्रशिक्षु भी रहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके. अब तक किसी भी मरीज से इनके काम को लेकर शिकायत नहीं मिली है. कई बार ये छात्र अन्य प्रशिक्षुओं से भी अधिक मेहनत और जिम्मेदारी के साथ अपना काम करते हैं. स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में चल रहा यह प्रशिक्षण केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समावेशी समाज की मजबूत मिसाल भी पेश कर रहा है.
About the Author

प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
और पढ़ें










