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Ambala cantt station news : अंबाला कैंट स्टेशन किसी के लिए सफर शुरू करने की जगह है तो किसी के लिए अंतिम पड़ाव, लेकिन इस स्टेशन की पहचान केवल ट्रेनों की आवाजाही तक सीमित नहीं. इसके साथ जुड़ा है अंबाला का इतिहास, ब्रिटिश दौर, देश का बंटवारा और बदलते भारत की यादें. अब करीब 100 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के तहत अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को नया आयाम देने की तैयारी है. लोकल 18 से अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम यशनजीत सिंह बताते हैं कि वंदे भारत समेत कई एक्सप्रेस और दूसरे ट्रेनें इस जंक्शन से गुजरती हैं. ऐसे में पुराने स्टेशन को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक विकसित करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
अंबाला. हरियाणा के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है. किसी के लिए यह स्टेशन सफर शुरू करने की जगह है तो किसी के लिए अंबाला पहुंचने का पहला पड़ाव, लेकिन इस स्टेशन की पहचान केवल ट्रेनों की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ अंबाला के इतिहास, ब्रिटिश दौर, देश के बंटवारे और बदलते भारत की कई यादें जुड़ी हुई हैं. अब इसी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं की सौगात मिलने जा रही है. करीब 100 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के तहत अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन का स्वरूप बदलने की तैयारी चल रही है. अंबाला का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि पहले इसका नाम ‘अम्बवाला’ था और यह क्षेत्र पुराने पंजाब का हिस्सा हुआ करता था.
बीते दौर की कई निशानी
ब्रिटिश शासन के दौरान अंबाला कैंट क्षेत्र का तेजी से विकास हुआ और रेलवे ने इस शहर को देश के प्रमुख रेल मार्गों से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई. अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन आज भी ब्रिटिश दौर की कई यादों को अपने भीतर समेटे हुए है. स्टेशन की पुरानी इमारतें और परिसर में रखा पुराना रेल इंजन यात्रियों को बीते दौर की याद दिलाता है. कभी इसी स्टेशन से दिल्ली, पंजाब और कालका की ओर रेल संपर्क मजबूत हुआ और आगे चलकर पाकिस्तान की तरफ भी रेल लाइन से जुड़ाव रहा.
लगातार बढ़ रही व्यस्तता
देश के बंटवारे के समय भी यह स्टेशन इतिहास का गवाह बना. पाकिस्तान से भारत आने वाले अनेक परिवार रेल के जरिए अंबाला पहुंचे और यहीं से उन्होंने नए जीवन की शुरुआत की. इनमें से कई परिवार आज भी अंबाला में रह रहे हैं. यही वजह है कि अंबाला कैंट स्टेशन सिर्फ रेलवे की इमारत नहीं, बल्कि कई परिवारों की यादों और इतिहास से जुड़ा स्थान है. समय के साथ अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की व्यस्तता लगातार बढ़ी है, यहां से बड़ी संख्या में यात्री देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए सफर करते हैं. वंदे भारत समेत कई प्रमुख एक्सप्रेस और दूसरे ट्रेनें इस जंक्शन से गुजरती हैं. ऐसे में पुराने स्टेशन को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक विकसित करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
लिए मिट्टी के नमूने
इसी दिशा में करीब 100 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के तहत स्टेशन को नया स्वरूप देने की तैयारी है. परियोजना के तहत विशाल प्रतीक्षालय, आधुनिक लिफ्ट और एस्केलेटर, बेहतर पार्किंग व्यवस्था, दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं और दूसरी आधुनिक यात्री सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है. रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) और रेलवे की तकनीकी टीम ने स्टेशन परिसर के तीन अलग-अलग स्थानों पर करीब 20 मीटर तक ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने लिए हैं. इन नमूनों की जांच की गई है ताकि प्रस्तावित नई इमारत की नींव और निर्माण को लेकर तकनीकी खाका तैयार किया जा सके. प्रारंभिक स्तर पर मिट्टी को निर्माण के लिए उपयुक्त माना गया है, अब संबंधित रिपोर्ट को आगे भेजे जाने के बाद मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पूरी होगी.
रह जाओगे देखते
लोकल 18 से अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम यशनजीत सिंह ने बताया कि अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन काफी पुराना स्टेशन है और इसके पुनर्विकास की जिम्मेदारी आरएलडीए को सौंपी गई है. स्टेशन का विकास ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत किया जाएगा. एक तरफ ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक पहचान और बंटवारे की यादें, इसकी विरासत को संजोए रखेंगी, दूसरी तरफ आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित नया स्टेशन अंबाला को विकास की नई सौगात देगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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