Haryana News:राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के तहत लगभग 15,056 करोड़ रुपये की स्वीकृति से हरियाणा में ग्रामीण अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। इस राशि से प्रदेशभर में 6,175 अवसंरचना परियोजनाओं को सहायता प्रदान की गई है, जिनसे सिंचाई, ग्रामीण सड़कों, पेयजल सुविधाओं तथा अन्य महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया गया है।
इन उपलब्धियों का उल्लेख आज नाबार्ड के 45 वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान किया गया, जिसमें हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। मुख्य सचिव ने कहा कि नाबार्ड राज्य में ग्रामीण परिवर्तन को गति देने तथा कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभरा है।
विकसित भारत-2047 का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि नाबार्ड समावेशी ग्रामीण विकास का एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। राज्य की भावी प्रगति मजबूत ग्रामीण अवसंरचना, टिकाऊ कृषि, वित्तीय समावेशन तथा सशक्त सामुदायिक संस्थाओं पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों तथा जमीनी स्तर के संगठनों को मिलकर सशक्त एवं आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में कार्य करना होगा।
सीधा लाभ किसानों और ग्रामीणों को मिल रहा
अपने वित्त सचिव के कार्यकाल को याद करते हुए रस्तोगी ने कहा कि उन्हें नाबार्ड के साथ निकटता से कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने राज्य के विकास में संस्था की सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि रियायती ब्याज दरों पर नाबार्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता से अनेक महत्वपूर्ण ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकीं, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण समुदायों को मिला।
डिजिटलीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार आवश्यक तकनीकी सहयोग के साथ सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन्हें अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक पैक्स को आर्थिक रूप से सक्षम एवं लाभकारी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे ये संस्थाएं ग्रामीण सहकारिता व्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन सकें।
समावेशी ग्रामीण विकास को मिलेगी गति
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ की मजबूत नींव सामूहिक प्रयासों, प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ही रखी जा सकती है। उन्होंने बैंकरों एवं सरकारी अधिकारियों का आह्वान किया कि वे अपनी नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), स्कूलों, कॉलेजों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य संस्थाओं का व्यक्तिगत मार्गदर्शन एवं सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निरंतर सहयोग से स्थानीय संस्थाएं सशक्त होंगी, जमीनी स्तर की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी तथा राज्य में समावेशी ग्रामीण विकास को गति मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव ने हरियाणा में नाबार्ड की विकासात्मक पहलों के प्रभाव को दर्शाने वाली कॉफी टेबल बुक तथा कृषि ऋण, परियोजना मूल्यांकन एवं कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए बैंकों के उपयोगार्थ तैयार यूनिट कॉस्ट बुक का भी विमोचन किया।
उद्यमियों का किया गया सम्मान
समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कारीगरों तथा महिला उद्यमियों को ग्रामीण विकास में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही एफपीओ, ओएफपीओ तथा कारीगरों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों एवं हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिसने हरियाणा के ग्रामीण उत्पादक समूहों की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित किया।
नाबार्ड की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी ने बताया कि संस्था ने हरियाणा में 710 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का कम्प्यूटरीकरण एवं डिजिटलीकरण कर तथा 131 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देकर किसान-स्वामित्व वाली संस्थाओं को मजबूत किया है।
किसानों को एक मंच पर लाया गया
उन्होंने बताया कि इन एफपीओ के माध्यम से 63,369 किसानों, जिनमें 14,017 महिलाएं शामिल हैं, को एक मंच पर लाया गया है। इससे किसानों को सामूहिक विपणन, बेहतर मूल्य प्राप्ति, आधुनिक तकनीकों को अपनाने तथा कृषि मूल्य श्रृंखलाओं से बेहतर जुड़ाव का लाभ मिला है। संस्थागत वित्तीय पहुंच को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड ने 28 एफपीओ को 11.12 करोड़ रुपये की ऋण सहायता तथा 9 एफपीओ को 60.38 लाख रुपये की इक्विटी अनुदान सहायता प्रदान की है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता एवं व्यावसायिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।
नाबार्ड ने जलवायु-अनुकूल कृषि को भी विशेष प्राथमिकता दी है। इसके तहत जलग्रहण क्षेत्र विकास, भूजल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर), सब्जी क्लस्टर तथा अन्य टिकाऊ कृषि पहलों को प्रोत्साहित किया गया है, जिनका उद्देश्य खेती की लागत कम करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी नाबार्ड की आजीविका संवर्धन योजनाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2022-23 से अब तक 5,010 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को डेयरी, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई, हस्तशिल्प तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे उनके लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित हुए हैं। इस अवसर पर वित्त विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री सी. जी. रजनी कान्थन, हरको बैंक के अध्यक्ष श्री भारत भूषण जुयाल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।











