Health Tips : ज्यादा सोचने की समस्या से कहीं ज्यादा घातक…बच्चों के पीछे पड़ा ये कैसा रोग?

On: August 21, 2026 10:46 PM
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अंबाला. देर रात तक जागना, सुबह स्कूल के लिए जल्दी उठना, पढ़ाई का दबाव और इसके बाद घंटों मोबाइल या दूसरी स्क्रीन पर समय बिताना. किशोरों की यह दिनचर्या उनकी नींद ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर भी असर डाल रही है. बदलती जीवनशैली के बीच तनाव और लगातार सोचते रहने की समस्या भी लोगों में बढ़ती दिखाई दे रही है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक ओपीडी में भी मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जुड़ी शिकायतों को लेकर मरीज पहुंच रहे हैं. लोकल 18 से अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉ. रजिता बताती हैं कि कई लोग किसी घटना या समस्या को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं, लगातार एक ही बात के बारे में सोचते रहने से तनाव बढ़ सकता है और व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान महसूस कर सकता है. डॉ. रजिता बताती हैं कि डिप्रेशन केवल ओवरथिंकिंग की वजह से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे पारिवारिक परिस्थितियां, लंबे समय का तनाव, आनुवंशिक और दूसरे मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं.

सुनाया मां-बेटे का किस्सा

डॉ. रजिता ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार एक मां बारिश के दौरान अपने बेटे के स्कूल से लौटने को लेकर काफी परेशान हो गई. तेज बारिश देखकर वह लगातार सोचती रही कि कहीं उसका बेटा बारिश में परेशान तो नहीं हो रहा होगा, चिंता करते-करते जब वह बेटे के पास पहुंची तो उसने देखा कि बेटा बिल्कुल खुश था. बेटे ने मां से कहा कि वह बारिश को लेकर परेशान नहीं, बल्कि खुश है, बिजली चमकने पर उसे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे भगवान उसकी अलग-अलग पोज में तस्वीरें खींच रहे हों. डॉक्टर के मुताबिक, इस घटना से यह सीख मिलती है कि किसी परिस्थिति को लेकर लगातार नकारात्मक सोचने के बजाय उसका सामना करने और सकारात्मक नजरिया रखने की कोशिश करनी चाहिए.

बालासन से भ्रामरी तक

डॉ. रजिता का कहना है कि परिवार में किसी तरह की समस्या हो तो उसे लेकर अकेले चिंता करने के बजाय परिवार के सदस्यों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए. अपनी परेशानी किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना भी मददगार हो सकता है. लगातार तनाव रहने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. बालासन, सेतुबंधासन, शवासन और भ्रामरी प्राणायाम जैसे अभ्यास मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं.

ये लक्षण घातक

डॉ. रजिता बताती हैं कि बच्चों और किशोरों में मानसिक परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें घर का तनाव, माता-पिता के बीच विवाद, पढ़ाई और परीक्षा का दबाव, स्कूल में बुलिंग, किसी दर्दनाक घटना का अनुभव और परिवार में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इतिहास शामिल हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चे में लंबे समय तक उदासी, पढ़ाई या पसंदीदा गतिविधियों में रुचि कम होना, नींद में बदलाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार दिखाई दें, तो इसे केवल “ज्यादा सोचने” की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित जांच और सलाह लेना जरूरी है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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