IIT Success Story: बहन से जाना JEE क्या है, जेईई क्रैक कर IIT पहुंचा गौरव, बना गांव का पहला IITian

On: August 11, 2026 8:30 AM
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JEE Success Story: हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव धामलावास के रहने वाले गौरव यादव ने JEE क्रैक कर IIT कानपुर में जगह बनाई तो यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए बड़ी उपलब्धि थी. गौरव अपने गांव से JEE Main और JEE Advanced दोनों परीक्षा पास कर IIT पहुंचने वाले पहले छात्र हैं. खास बात यह है कि जब वह JEE की तैयारी कर रहे थे तब उनके आसपास ऐसा कोई सीनियर नहीं था जो उन्हें इस परीक्षा की तैयारी या IIT तक पहुंचने का रास्ता बता सके.आज 20 साल के गौरव IIT कानपुर में BTech Civil Engineering के चौथे वर्ष में पढ़ रहे हैं और साथ ही Students’ Gymkhana के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. कभी जिस छात्र को अपने गांव में JEE और IIT की तैयारी को लेकर मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं मिला था आज वही दूसरे छात्रों को रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

रेवाड़ी के गांव में बीता बचपन

गौरव यादव हरियाणा के रेवाड़ी जिले के शांत गांव धामलावास से आते हैं. उनकी स्कूली पढ़ाई पड़ोसी गांव पिठरावास स्थित नव ज्‍योति सीनियर सेकेंडरी स्‍कूल (Nav Jyoti Senior Secondary School)से हुई. इसी दौरान गणित और विज्ञान में उनकी बुनियाद मजबूत हुई.गौरव के पिता रेवाड़ी जिला अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकील हैं जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. पिता कानून के क्षेत्र से जुड़े हैं, लेकिन गौरव ने इंजीनियरिंग को अपना करियर चुना.वह मानते हैं कि उनके माता-पिता ने कभी उन पर किसी खास करियर को चुनने का दबाव नहीं बनाया.माता-पिता ने उनके हर फैसले का समर्थन किया और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने की आजादी दी. गौरव के लिए यह समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा क्योंकि हर छात्र को अपने करियर को लेकर इतनी स्वतंत्रता नहीं मिलती.गांव से जुड़ी किसी खास चीज की कमी गौरव को ज्यादा महसूस नहीं होती लेकिन उन्हें अपने परिवार और खासकर अपनी दादी की सबसे ज्यादा याद आती है.

11वीं कक्षा में पहली बार JEE के बारे में पता चला

गौरव को JEE के बारे में पहली बार 11वीं कक्षा में जानकारी मिली.उनकी बड़ी बहन उस समय JEE की तैयारी कर रही थीं.इसी वजह से गौरव को पहली बार पता चला कि यह परीक्षा क्या है और इसके जरिए IIT में दाखिले का रास्ता खुलता है.जब उन्होंने JEE और IIT के बारे में समझा तो उन्होंने भी इसकी तैयारी करने का फैसला किया.12वीं कक्षा की शुरुआत में उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग में दाखिला लिया.गौरव ने नियमित स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ JEE की तैयारी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं कीं. उनकी पूरी JEE तैयारी गांव में घर से ही हुई.

गांव से JEE की तैयारी करना आसान नहीं था

ऑनलाइन कोचिंग के शिक्षकों से उन्हें काफी मदद मिली, लेकिन गांव से घर पर रहकर JEE की तैयारी करने की अपनी अलग चुनौतियां थीं.सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि धामलावास से पहले किसी ने JEE Main और JEE Advanced क्रैक कर IIT में जगह नहीं बनाई थी. गौरव के पास ऐसा कोई सीनियर नहीं था जिसे वह फोन कर अपनी समस्या पूछ सकें. कोई ऐसा साथी भी नहीं था, जिसके साथ वह JEE की तैयारी को लेकर चर्चा कर सकें या अपने सवालों पर सलाह ले सकें.उन्हें यह बताने वाला भी कोई नहीं था कि वह जिस तरीके से तैयारी कर रहे हैं वह सही दिशा है या नहीं.जब आसपास के लोग किसी दूसरे काम में व्यस्त हों और आपके पास अपने लक्ष्य को लेकर तुलना करने या अनुभव साझा करने वाला कोई न हो तो मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है. गौरव के साथ भी ऐसा हुआ.JEE की तैयारी के दौरान गौरव के मन में कई बार यह विचार आया कि शायद उन्हें ऑफलाइन कोचिंग जॉइन करनी चाहिए थी लेकिन घर पर परिवार के साथ रहकर पढ़ाई करने का जो आराम और भावनात्मक सहारा मिला उसे वह छोड़ना नहीं चाहते थे.आखिरकार उन्होंने घर से ही अपनी तैयारी जारी रखी. परिवार के बीच रहकर पढ़ाई करने का माहौल उनके लिए मजबूती बना और इसी के सहारे उन्होंने JEE की तैयारी पूरी की.

CSE और AI छोड़कर सिविल इंजीनियरिंग क्यों चुनी?

JEE में सफलता के बाद जब JoSAA Counselling का समय आया तो गौरव के सामने कई विकल्प थे. उस समय CSE, AI और दूसरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी ब्रांच छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थीं लेकिन गौरव ने इन ट्रेंडिंग ब्रांचों के बजाय कोर इंजीनियरिंग को प्राथमिकता दी और सिविल इंजीनियरिंग चुनी.Civil Engineering चुनने के पीछे उनके बचपन से जुड़ी एक खास वजह थी-गुरुग्राम का तेजी से बदलना.गौरव ने अपने आसपास गुरुग्राम को धीरे-धीरे विकसित होते देखा था. उन्होंने एक ऐसे शहर को बदलते देखा जो उनके जीवनकाल में ही तेजी से एक बड़े मेट्रोपॉलिटन हब में बदल गया.सड़कें बनीं,इमारतें खड़ी हुईं और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ.इसी बदलाव ने उन्हें आकर्षित किया.उन्हें यह बात पसंद आई कि सिविल इंजीनियरिंग में किसी इंजीनियर के काम का असर जमीन पर साफ दिखाई देता है जो चीज बनाई जाती है उसे सड़क, इमारत या दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखा जा सकता है.इसी वजह से उनके लिए Civil Engineering सिर्फ एक ब्रांच चुनने का फैसला नहीं था बल्कि उनकी रुचि से जुड़ा स्वाभाविक विकल्प था.

जुलाई 2023 में IIT कानपुर पहुंचे गौरव

गौरव ने जुलाई 2023 में IIT कानपुर में दाखिला लिया.यह उनके लिए पहली बार था जब वह परिवार और घर के परिचित माहौल से निकलकर एक बिल्कुल नई दुनिया में पहुंचे थे.IIT कानपुर में शुरुआती कुछ सप्ताह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे. यहां पढ़ाई की रफ्तार तेज थी.हॉस्टल का माहौल घर से बिल्कुल अलग था और मेस का खाना भी उन्हें अपनी मां के हाथ के खाने जैसा नहीं लगा. नई जगह, नई पढ़ाई और नया माहौल.इन सबके बीच शुरुआत में उन्हें काफी परेशानी हुई.IIT कानपुर में सामाजिक माहौल ने गौरव को नए कैंपस में जल्दी घुलने-मिलने में मदद की.

IIT कानपुर में कैसी है गौरव की रोजमर्रा की जिंदगी?

20 साल के गौरव इस समय IIT कानपुर में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग (BTech Civil Engineering)के चौथे वर्ष में हैं. उनका सामान्य दिन करीब सुबह 9 बजे शुरू होता है.सुबह का समय कक्षाओं और लैब में बीतता है.दोपहर के बाद उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है. Students’ Gymkhana के अध्यक्ष होने के कारण उन्हें मीटिंग्स, चर्चाओं, छात्रों की समस्याओं और कैंपस में होने वाली आगामी गतिविधियों की योजना में समय देना पड़ता है.शाम का समय वह दोस्तों के साथ बिताते हैं. कभी IIT कानपुर के हरे-भरे कैंपस में घूमना, कभी हॉस्टल की छत पर बैठना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.

अब दूसरे छात्रों की मदद कर रहे हैं

गौरव की कहानी का सबसे खास पहलू यही है कि JEE की तैयारी के दौरान वह अपने गांव से इस रास्ते पर चलने वाले पहले छात्र थे. उन्हें न कोई सीनियर मिला, न कोई ऐसा व्यक्ति जिसने पहले JEE की तैयारी की हो और उन्हें बता सके कि किस दिशा में आगे बढ़ना है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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