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Dayalpur Ghewar Faridabad : सावन, तीज और रक्षाबंधन के सीजन में फरीदाबाद के दयालपुर गांव का घेवर लोगों की पहली पसंद बन गया है. महज दूसरे साल में ही यहां का स्वाद दिल्ली-एनसीआर से लेकर गुजरात, यूपी और विदेशों तक पहुंच गया है. शुद्ध देसी घी, खांड और कोयले की भट्ठी पर तैयार होने वाला यह घेवर रोज करीब एक क्विंटल बिक रहा है. कल 18 से नमन बताते हैं कि मेरी दुकान पिछले साल खुली है. अमेरिका के न्यू जर्सी और जर्मनी तक हमारा घेवर गया है. नमन बताते हैं कि उनके पापा पहले सूबेदार थे. 28 फरवरी 2023 को रिटायर हुए. दुकान पिताजी ने खोली है. बिना दूध वाला घेवर 500 रुपये और मलाई-खोया वाला घेवर 550 रुपये किलो है.
फरीदाबाद. सावन, तीज और रक्षाबंधन के त्योहारों के बीच फरीदाबाद के दयालपुर गांव का घेवर इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. महज दूसरे साल में ही इस दुकान ने ऐसा नाम कमा लिया है कि यहां पूरे दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात और दूसरे राज्यों से भी ग्राहक पहुंच रहे हैं. अमेरिका समेत कई देशों से घेवर के ऑर्डर भी आ रहे हैं. ग्राहकों का कहना है कि यहां मिलने वाला स्वाद उन्हें कहीं और नहीं मिलता. यही वजह है कि त्योहारों के सीजन में यहां लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है. लोकल 18 से नमन बताते हैं कि मेरी दुकान पिछले साल खुली थी. पूरे दिल्ली-एनसीआर से तो ग्राहक आते ही हैं, गुजरात और दूसरे राज्यों से भी ग्राहक आ रहे हैं. यहां तक कि विदेशों से भी मेरे पास ग्राहक आ रहे हैं. अमेरिका के न्यू जर्सी और जर्मनी तक हमारा घेवर गया है.
40 कारीगर बनाने में जुटे
नमन बताते हैं कि वैसे हमारी दुकान पर 15 से 20 कारीगर रहते हैं, लेकिन अब त्योहारों का सीजन आ गया है तो करीब 40 कारीगर काम कर रहे हैं. हमारे घेवर में सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि क्वालिटी भी है. हम शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल करते हैं. बाहर से कोई नकली घी नहीं मंगवाते. बिल्कुल ओरिजिनल घी और खांड का इस्तेमाल करते हैं. हम गैस पर घेवर नहीं बनाते. कोयले की भट्ठी पर वैदिक तरीके से तैयार करते हैं. इससे स्वाद और भी बेहतरीन हो जाता है.
नमन बताते हैं कि मेरे पापा पहले सूबेदार थे और 28 फरवरी 2023 को रिटायर हुए. दुकान पिताजी ने खोली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हरियाणा के घेवर का जिक्र किया था. हरियाणा और उत्तर प्रदेश में घेवर बहुत चलता है. रक्षाबंधन, तीज और जन्माष्टमी पर इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है. बिना दूध वाला घेवर 500 रुपये किलो और मलाई-खोया वाला घेवर 550 रुपये किलो मिलता है. कितना बिक जाता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन फिर भी रोज करीब एक क्विंटल घेवर निकल जाता है. मैं अभी 12वीं कक्षा में पढ़ रहा हूं.
छापे में निकला शुद्ध
नमन के मुताबिक, पिछले साल सीएम फ्लाइंग का भी छापा पड़ा था. उसकी रिपोर्ट हमारे पास आ चुकी है. हमारी दुकान का घेवर सभी गुणवत्ता मानकों पर पास हुआ है. अगर कुछ भी निगेटिव होता तो दुकान पिछले साल ही बंद हो जाती. इस साल दुकान नहीं खुलती. यदि किसी को कोई शंका है तो हम पूरी रिपोर्ट की प्रिंट निकालकर दिखा सकते हैं. ग्राहक धर्मेंद्र बताते हैं किमैं पलवल से आगे काशीपुर से सिर्फ घेवर खाने के लिए आया हूं. ऐसा स्वाद कहीं भी नहीं है. यह बिल्कुल प्योर है. मैंने 550 रुपये किलो के हिसाब से लिया है. पिछले साल भी आया था. अभी दोस्तों के साथ मिलकर डेढ़ किलो घेवर खा चुके हैं.
नहीं मिलता ऐसा स्वाद
ग्राहक वीरेंद्र बताते हैं कि हम यहां घेवर खाने के लिए आए थे. अभी डेढ़ किलो घेवर लिया है. जब भी इधर से गुजरते हैं तो डेढ़ या दो किलो घेवर लेकर जाते हैं. लेकर भी जाते हैं और यहीं खाकर भी जाते हैं. हर चार-पांच दिन में हम यहां आते रहते हैं. ग्राहक निखिल बताते हैं कि मैं मोहना से आया हूं. हर बार घेवर यहीं से ले जाते हैं. अभी एक पाव खाने के लिए लिया है. एक पाव और खाने के लिए पर्ची कटवा ली है. घेवर तो बहुत जगह मिलता है, लेकिन यहां का स्वाद सबसे बेहतरीन है. ग्राहक कृष्ण कुमार बताते हैं कि मैं नोएडा से फरीदाबाद घेवर लेने आया हूं. वैसे मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूं, लेकिन नोएडा से आया हूं. मैं एक किलो घेवर लेकर जा रहा हूं. नोएडा में ऐसा स्वाद नहीं मिलता.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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