अंबाला: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही जहां खेतों में पारंपरिक फसलों की तैयारी तेज हो जाती है, वहीं किसानों के लिए कम लागत में कमाई का एक और विकल्प सामने आया है. दरअसल यह विकल्प है मशरूम की खेती. खास बात यह है कि इसके लिए किसानों को बड़े खेत या ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. किसान अपने घर के एक कमरे या छोटी सी झोपड़ी में भी मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं.
बता दें कि बाजार में मशरूम की बढ़ती मांग को देखते हुए बागवानी विभाग भी अंबाला जिले के किसानों को इसकी खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ सरकार की ओर से 85 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जा रहा है.
20×20 फुट के शेड या झोपड़ी में खेती
वहीं अंबाला जिला बागवानी अधिकारी डॉ. सत्यनारायण ने लोकल 18 को बताया कि किसान मशरूम की खेती दो तरीकों से कर सकते हैं. पहला तरीका सीजनल मशरूम उत्पादन का है, जिसे किसान 20×20 फुट के शेड या झोपड़ी में शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा किसान अपने घर के एक कमरे में 100 से 150 बैग लगाकर भी मशरूम की खेती कर सकते हैं.
करीब 51 हजार रुपये खर्च
दूसरा तरीका एसी यूनिट लगाकर सालभर मशरूम उत्पादन करने का है. इस तरह किसान अपनी आर्थिक क्षमता और सुविधा के अनुसार व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. डॉ. सत्यनारायण ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए शेड तैयार करने पर करीब 51 हजार रुपये खर्च आता है. इस पर पात्र किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है, जबकि सामान्य वर्ग के किसानों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान बताया गया है.
वहीं अनुसूचित जाति के किसानों के लिए विशेष योजना भी चलाई जा रही है. इसके तहत बांस की झोपड़ी बनाने के लिए 25,500 रुपये और मशरूम उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली ट्रे के लिए 25,500 रुपये की सहायता दी जाती है. इस प्रकार पात्र किसान को कुल 51 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है.
मशरूम का बीज ऐसे करें तैयार
जो किसान बड़े स्तर पर मशरूम का कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए भी सरकार की ओर से योजना चलाई जा रही है. इसके तहत मशरूम का बीज तैयार करने के लिए स्पॉन लैब स्थापित करने पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है. इस प्रोजेक्ट की लागत 15 लाख रुपये निर्धारित है. इसके अलावा मशरूम कंपोस्ट यूनिट और मशरूम प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने के लिए 20-20 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है. किसान अपनी जरूरत के अनुसार एक, दो या तीनों यूनिट स्थापित कर सकते हैं. इन यूनिटों के माध्यम से पूरे साल मशरूम उत्पादन किया जा सकता है.
स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर
योजना के तहत बैंक ऋण और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से सब्सिडी की राशि दो चरणों में लोन खाते में भेजी जाती है. उन्होंने बताया कि अंबाला जिले में भी मशरूम उत्पादन को लेकर किसानों की रुचि बढ़ रही है. साहा और सोलर क्षेत्र के किसान मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट खाद खुद तैयार कर रहे हैं. इसके साथ ही जिले के बनाना क्षेत्र में भी किसान इस खेती से जुड़ रहे हैं. विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान इस व्यवसाय को अपनाते हैं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
बागवानी विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण अनिवार्य
उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती पर सरकारी अनुदान लेने के लिए किसानों को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है. कृषि विज्ञान केंद्र सहित विभिन्न संस्थानों में किसानों को चार से पांच दिन की निशुल्क ट्रेनिंग दी जाती है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र प्राप्त करना जरूरी है. इसके अलावा किसान के पास फैमिली आईडी होनी चाहिए और बागवानी विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण भी अनिवार्य है.
इच्छुक किसान बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं या जिला बागवानी कार्यालय में जाकर योजना की जानकारी ले सकते हैं. डॉ. सत्यनारायण के अनुसार, मशरूम की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है. लोग इसे पनीर के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में अंबाला के किसान फसल विविधीकरण के तहत मशरूम उत्पादन अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं.










