अब बिना केमिकल चमचमाएगा घर, इस आसान तरीके से तैयार करें नेचुरल क्लीनर वो भी बिना खर्च के

On: July 30, 2026 3:25 AM
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फरीदाबाद को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने की शुरुआत घर की रसोई से भी हो सकती है. शहर की सुचिता साहू फलों और सब्जियों के छिलकों से बायो एंजाइम व 7-8 उपयोगी प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं. उनका दावा है कि इससे घर का कचरा कम होता है, केमिकल क्लीनर की जरूरत घटती है और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है. वे हजारों लोगों को इसकी ट्रेनिंग भी दे चुकी हैं.

फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की बात अक्सर होती है, लेकिन यह सपना तभी पूरा होगा जब शहर का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझेगा. आज भी कई लोग घर का कूड़ा और फलों के छिलके इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे गंदगी बढ़ती है. अगर इसी कचरे का सही इस्तेमाल किया जाए तो शहर साफ भी रहेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. फरीदाबाद की एक महिला ने इसी सोच को आगे बढ़ाकर लोगों के लिए मिसाल पेश की है.

सुचिता साहू बताती हैं रसोई से निकलने वाले संतरे, मौसमी, पपीते और दूसरे फलों के छिलकों को फेंकने की जरूरत नहीं है. Local18 से बातचीत में बताती हैं इन्हीं छिलकों से 7 से 8 तरह के उपयोगी प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं. इनका इस्तेमाल घर की सफाई, कपड़े धोने और कई दूसरे कामों में होता है. हर घर अगर यह तरीका अपनाए तो कचरा भी कम होगा और पर्यावरण भी साफ रहेगा.

सुचिता साहू बताती हैं बायो एंजाइम बनाना बिल्कुल आसान है और इसे कोई भी घर पर तैयार कर सकता है. इसके लिए 300 ग्राम फलों के छिलके, 100 ग्राम गुड़ और 1 लीटर पानी को एक एयरटाइट प्लास्टिक के जार में डाल दें. पहले 20 से 25 दिन तक रोज थोड़ा ढक्कन खोलकर गैस बाहर निकालें. जार को छांव में रखें. करीब 90 दिन बाद तैयार लिक्विड बायो एंजाइम कहलाता है.

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सुचिता साहू बताती हैं घरों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल क्लीनर शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके मुकाबले बायो एंजाइम पूरी तरह प्राकृतिक होता है. इससे फर्श, बर्तन और टॉयलेट की सफाई आसानी से की जा सकती है. यह सिर्फ सफाई ही नहीं करता बल्कि वातावरण को भी बेहतर रखने में मदद करता है. साथ ही इसका इस्तेमाल पौधों के लिए भी किया जा सकता है.

सुचिता साहू बताती हैं मैं सिर्फ बायो एंजाइम ही नहीं बनातीं, बल्कि इन्हीं छिलकों से कपड़े धोने वाला लिक्विड भी तैयार करती हैं. इसे वॉशिंग मशीन में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी कीमत 1 लीटर की 230 रूपये है. इसके अलावा चींटी और छोटे कीड़ों को दूर रखने वाला लिक्विड भी तैयार किया जाता है, जिसकी कीमत 160 रूपये प्रति लीटर है. मेरे पास 7 से 8 तरह के प्रोडक्ट हैं.

सुचिता साहू बताती हैं मेरा मकसद सिर्फ प्रोडक्ट बनाना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है. मैं स्कूलों, कॉलेजों और कई संस्थानों में जाकर बच्चों, युवाओं और महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग देती हूं. अब तक हजारों लोग मेरे यह तरीका सीख चुके हैं. अगर हर परिवार रसोई के कचरे का सही इस्तेमाल करे तो शहर में गंदगी काफी हद तक कम हो सकती है.

सुचिता साहू बताती हैं इस काम के लिए किसी महंगी मशीन या बड़े खर्च की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद प्लास्टिक का जार, गुड़, पानी और फलों के छिलके ही काफी हैं. थोड़ा धैर्य रखने के बाद 90 दिन में तैयार होने वाला यह लिक्विड लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे घर का कचरा भी कम होता है और रोजमर्रा के कई काम भी आसान हो जाते हैं.

सुचिता साहू बताती हैं अगर लोग रसोई से निकलने वाले गीले कचरे को फेंकने की बजाय उसका सही उपयोग करें तो शहर की सफाई में बड़ा बदलाव आ सकता है. इससे कूड़ा कम होगा, केमिकल का इस्तेमाल घटेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. छोटी-छोटी आदतें ही बड़े बदलाव की शुरुआत करती हैं और हर परिवार इसमें अपनी भागीदारी निभा सकता है.

सुचिता साहू बताती हैं स्मार्ट सिटी सिर्फ बड़ी योजनाओं से नहीं बनती, बल्कि लोगों की अच्छी आदतों से बनती है. अगर हर घर फलों और सब्जियों के छिलकों का सही इस्तेमाल करना शुरू कर दे तो कचरा काफी कम हो जाएगा. इससे शहर साफ रहेगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी बेहतर माहौल मिलेगा. फरीदाबाद के लिए यह पहल दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है.

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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