प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड के खिलाफ लोगों का फूटा गुस्सा, कहा- घर में खाना खाना भी हुआ मुश्किल

On: July 18, 2026 10:51 AM
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फरीदाबाद: कभी जहां हरियाली और सुकून था. आज वहां कूड़े का पहाड़ खड़ा है. प्रतापगढ़ (सेक्टर-56) डंपिंग यार्ड से उठ रही कूड़े की तेज बदबू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. डंपिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध ने हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है. हालात ऐसे हैं कि लोग घरों के कूलर तक नहीं चला पा रहे. बाहर बैठना तो दूर घर के अंदर खाना खाना भी मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से वे इस समस्या को झेल रहे हैं. कई बार धरना-प्रदर्शन किए, पार्षद, विधायक, मंत्री, केंद्रीय राज्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपे, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला. लोगों का आरोप है कि नगर निगम रोजाना 70 से 80 टन कूड़ा यहां डाल रहा है जिससे पूरे इलाके में बदबू फैल रही है और कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

तीन साल से हम ऐसे ही बदबू में जी रहे हैं

Local18 से बातचीत में स्थानीय निवासी महिला कुसुम बताती हैं, मुझे यहां रहते हुए करीब 12 साल हो गए. तीन साल से हम ऐसे ही बदबू में जी रहे हैं. इससे पहले सब कुछ बिल्कुल ठीक था. कूलर चलाते हैं तो वह बदबू को घर के अंदर खींच लेता है. इतनी भीषण गर्मी में भी कूलर नहीं चला पा रहे हैं.

स्थानीय निवासी रेखा बताती हैं मैं राम नगर की निवासी हूं. पिछले तीन साल से बहुत ज्यादा समस्या है. घर में एक रोटी का निवाला भी नहीं खा सकते. इतनी ज्यादा बदबू आती है कि सांस लेने में दिक्कत होती है. बच्चे घर में बीमार पड़ रहे हैं और घर के बाहर बैठना भी मुश्किल हो गया है.

डंपिंग यार्ड की वजह से यहां हर कोई परेशान

बुजुर्ग अम्मा बिमला बताती हैं मुझे यहां रहते हुए 12 साल हो गए. डंपिंग यार्ड की वजह से यहां हर कोई परेशान है. बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है.

स्थानीय निवासी लक्ष्मी बताती हैं मैं तीन साल से यहां रह रही हूं. जब से यहां आई हूं तभी से इस बदबू को झेल रही हूं. जीना मुश्किल हो गया है. हम लगातार धरना दे रहे हैं. यहां से कूड़ा हटना चाहिए, क्योंकि यहां सभी लोगों के अपने-अपने मकान हैं.

डंपिंग यार्ड की चपेट में पांच कॉलोनियां और दो सेक्टर

डॉ. अमोद कुमार बताते हैं मेरा मकान यहां से सिर्फ 200 मीटर की दूरी पर है. इस डंपिंग यार्ड की चपेट में पांच कॉलोनियां और दो सेक्टर आते हैं. एमसीएफ ने इस पूरे इलाके को जीता-जागता मुर्दाघर बना दिया है. लोगों को धीमी-धीमी मौत दी जा रही है.

डॉ. अमोद कुमार बताते हैं एमसीएफ कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने कहा बंधवाड़ी बंद होने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण यहां कूड़ा डाला जा रहा है. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर छह महीने में समाधान होगा, तो इसे लिखित में क्यों नहीं दिया जा रहा. कल को आपका ट्रांसफर हो जाएगा तो फिर इस आश्वासन का क्या होगा.

दूसरी बात सुप्रीम कोर्ट ने कहां अनुमति दी कि भारी आबादी के बीच बंधवाड़ी का कूड़ा डाला जाए. बंधवाड़ी पहाड़ों के बीच थी, लेकिन यहां घनी आबादी है. फरीदाबाद और बंधवाड़ी का कूड़ा आबादी के बीच डाला जा रहा है. आप यहां आधा घंटा बैठकर दिखा दीजिए. 12 साल पहले जब लोगों ने यहां प्लॉट लिए थे तब यहां हरियाली थी और बहुत सुंदर वातावरण था. एमसीएफ ने यहां सैकड़ों पेड़ काट दिए जिसका जुर्माना भी निगम को भरना पड़ा.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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