पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से केंद्र को झटका: PMFBY योजना में 85 करोड़ की गड़बड़ी का मामला, नोटिस पर रोक

On: February 16, 2026 12:04 PM
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हरियाणा: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कार्यान्वयन में कथित परिचालन खामियों को लेकर क्षेमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हरियाणा सहित कई राज्यों से मिली शिकायतों के बाद की गई।

हालांकि कंपनी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। 9 फरवरी को हाईकोर्ट ने कंपनी को पैनल से हटाने के लिए जारी नोटिस पर अगली सुनवाई (8 जुलाई) तक आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

3 फरवरी को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस

केंद्र द्वारा 3 फरवरी को जारी नोटिस में कंपनी से 16 फरवरी तक जवाब मांगा गया था। इसमें पूछा गया कि खरीफ 2026 से उसे योजना के क्रियान्वयन से क्यों न हटाया जाए और ब्लैकलिस्ट क्यों न किया जाए।

85 करोड़ रुपये के दावे लंबित

आरोप है कि कंपनी ने भिवानी, चरखी दादरी और नूंह जिलों में रबी 2023-24 के लगभग 85 करोड़ रुपये के दावों का समय पर निपटारा नहीं किया। हरियाणा सरकार के अनुसार, तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) ने 9 अक्टूबर 2025 को आदेश दिया था कि आदेश मिलने के सात दिनों के भीतर दावों का भुगतान किया जाए।

राज्य ने 26 अगस्त 2025 को TAC के निर्देश कंपनी को भेज दिए थे, लेकिन कंपनी ने फैसले की समीक्षा के लिए केंद्र से अपील की। केंद्र ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि मामले की विस्तृत जांच हो चुकी है और पुनर्विचार का अनुरोध निराधार है। इसके बाद भी दावों का भुगतान लंबित रहा।

कई राज्यों ने की पैनल से हटाने की मांग

नोटिस के अनुसार हरियाणा, तमिलनाडु और राजस्थान सरकारों ने पीएमएफबीवाई और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के तहत गंभीर परिचालन चूक का आरोप लगाते हुए कंपनी को पैनल से हटाने और ब्लैकलिस्ट करने की मांग की थी।

क्लस्टर-III में बड़ी संख्या में दावे लंबित

राज्य सरकार के पत्र में उल्लेख किया गया कि कंपनी के अधीन क्लस्टर-III (आठ जिलों) में बड़ी संख्या में दावे लंबित हैं। किसानों और स्थानीय अधिकारियों द्वारा बार-बार संपर्क और दस्तावेज जमा करने के बावजूद भुगतान में देरी हो रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और योजना पर भरोसा प्रभावित हो रहा है।

किसान संगठनों का आरोप

अखिल भारतीय किसान सभा के नेता बलबीर सिंह थकन ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 25 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग समय पर जवाब दाखिल नहीं कर सका। उनके अनुसार विभाग की लापरवाही के कारण ही अदालत ने केंद्र की कार्रवाई पर रोक लगाई।

आगे क्या?

अब इस मामले में अंतिम निर्णय 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है। वहीं, कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों को समय पर मुआवजा भुगतान के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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