जेल की सलाखों के पीछे चलेगी पाठशाला, 17 कैदी बनेंगे शिक्षक और 236 बंदी स्टूडेंट, सरकार की अनोखी पहल

On: August 10, 2026 8:19 PM
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अंबाला: कहते हैं कि शिक्षा सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि जिंदगी को नई दिशा देने का माध्यम है. यही सोच अब अंबाला सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे भी दिखाई दे रही है और यहां अब कुछ कैदी खुद शिक्षक बनकर अपने साथी कैदियों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं. दरअसल उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS) के तहत अंबाला शिक्षा विभाग ने जेल में निरक्षर कैदियों को शिक्षित करने की पहल शुरू की है. खास बात यह है कि इन कैदियों को पढ़ाने के लिए बाहर से शिक्षक नहीं, बल्कि जेल में बंद शिक्षित कैदियों को ही स्वैच्छिक शिक्षक बनाया गया है.

बता दें कि शिक्षा विभाग की ओर से किए गए सर्वे के दौरान अंबाला सेंट्रल जेल में 236 कैदी निरक्षर पाए गए थे. वहीं, 17 ऐसे कैदी मिले जो शिक्षित हैं. इसके बाद सभी 236 निरक्षर कैदियों का उल्लास पोर्टल पर लर्नर के तौर पर पंजीकरण किया गया, जबकि 17 शिक्षित कैदियों को स्वैच्छिक शिक्षक यानी वॉलंटियर टीचर के रूप में पंजीकृत किया गया है. अब यही 17 कैदी अपने साथी बंदियों को पढ़ने-लिखने का ज्ञान दे रहे हैं.

उल्लास परीक्षा में कैदी होंगे शामिल
इस अभियान के तहत पढ़ाई करने वाले सभी 236 कैदियों को सितंबर 2026 में होने वाली उल्लास परीक्षा में शामिल करवाने की तैयारी है. परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले प्रतिभागियों को भारत सरकार की ओर से साक्षरता प्रमाण पत्र प्रदान दिया जाएगा. शिक्षा विभाग का प्रयास है कि जेल में निरक्षर पाए गए सभी कैदी इस परीक्षा में शामिल हों और साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ें.

34 हजार लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य
वहीं इस बारे में अंबाला जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने लोकल 18 को बताया है कि उल्लास कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश को साक्षर बनाने की दिशा में काम करना है. उन्होंने बताया कि अंबाला जिले को करीब 34 हजार लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य मिला था, लेकिन शिक्षा विभाग की टीम ने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 35,054 लोगों को उल्लास पोर्टल पर पंजीकृत किया है.

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में एक निरक्षर व्यक्ति को लर्नर के रूप में जोड़ा जाता है और उसके साथ एक शिक्षित व्यक्ति को वॉलंटियर टीचर के तौर पर पंजीकृत किया जाता है. यह शिक्षक लर्नर को बुनियादी शिक्षा देने का काम करता है.इसके बाद मार्च और सितंबर में होने वाली परीक्षा के माध्यम से उसकी प्रगति का आकलन किया जाता है.

साक्षरता से जीवन को आगे बढ़ाने में मदद
उन्होंने बताया कि अंबाला सेंट्रल जेल में शुरू की गई यह पहल इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां एक कैदी दूसरे कैदी को शिक्षा देगा. जिस जगह को आमतौर पर सजा और बंदिशों से जोड़कर देखा जाता है, वहीं अब किताब और पढ़ाई की बात भी होगी. शिक्षा विभाग का मानना है कि साक्षरता से कैदियों को न सिर्फ पढ़ने-लिखने में मदद मिलेगी, बल्कि जेल से बाहर निकलने के बाद उन्हें सामान्य जीवन में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर भी मिल सकते हैं.

जेल का कैदी ऐसे बनता है वॉलंटियर 
सुधीर कालड़ा ने बताया कि जिले में अब तक करीब 22 हजार लोगों को उल्लास कार्यक्रम के तहत साक्षरता प्रमाण पत्र मिल चुका है. उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि जिले में कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे और सभी लोग शिक्षित हो जाए. उन्होंने बताया कि उल्लास कार्यक्रम को गांव, गली और मोहल्लों तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग युवाओं को भी इससे जोड़ रहा है. जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, छठीं कक्षा पास युवा भी वॉलंटियर के तौर पर किसी निरक्षर व्यक्ति को पढ़ा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि युवा अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करें, जिन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता है.

कैदियों के जीवन में लाएगी बदलाव
उन्होंने कहा कि कोई युवा अपने घर के बुजुर्ग, पड़ोसी या आसपास रहने वाले किसी निरक्षर व्यक्ति को पढ़ाकर उसे साक्षर बना सकता है. ऐसे में अंबाला जेल की यह पहल सिर्फ 236 कैदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और सीखने-सिखाने के लिए दीवारें भी बाधा नहीं बन सकती हैं. जेल की सलाखों के पीछे शुरू होने वाली यह पाठशाला अब कैदियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखने की तैयारी में है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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