फरीदाबाद: फरीदाबाद में एक ऐसी गौशाला है, जहां गायों की सेवा के साथ-साथ गोबर से रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी तैयार की जा रही है. यहां गाय के गोबर को बेकार नहीं समझा जाता, बल्कि उससे गमले, घड़ी, धूपबत्ती, हवन सामग्री, हवन स्टिक, समरानी कप, लकड़ी और कई दूसरे उपयोगी प्रोडक्ट बनाए जाते हैं.
सबसे खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट को बनाने का काम आसपास के गांवों की महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को सिखाया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है. Local 18 की टीम पहुंची फरीदाबाद की देवाश्रय गौशाला, जहां जाना कि आखिर गाय के गोबर से ये प्रोडक्ट कैसे तैयार होते हैं और इनके पीछे लोगों की मेहनत कैसी है.
गाय के गोबर से कई प्रोडक्ट तैयार
Local 18 से बातचीत में गौशाला में काम करने वाली राजवंती बताती हैं कि मैं पास के नीमका गांव से आती हूं. डेढ़ साल से यहां काम कर रही हूं. सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक नौकरी करती हूं. यहां गाय के गोबर से गमले, घड़ी, समरानी कप और दूसरे कई प्रोडक्ट बनाती हूं. इस काम से मुझे रोजगार मिला है और अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर पा रही हूं.
जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार
फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर अंशु गुप्ता बताती हैं कि ज्यादातर लोग जानते हैं कि गाय के गोबर से खाद बनती है. लेकिन यहां हम इससे लकड़ी, हवन लकड़ी, हवन सामग्री, गमले, घड़ी और कई दूसरे उपयोगी प्रोडक्ट भी बनाते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि बेसहारा गायों की सेवा के साथ-साथ यह काम जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहा है. हमारा एक दिव्यांग स्कूल भी है, जहां करीब 50 से 60 बच्चों को गाय के गोबर से प्रोडक्ट बनाना सिखाया जा रहा है. बच्चे बहुत अच्छे तरीके से यह काम सीख रहे हैं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
वातावरण को रखता शुद्ध
अंशु गुप्ता बताती हैं कि हम गाय के गोबर से धूपबत्ती भी बनाते हैं. बाजार में मिलने वाली कई धूपबत्तियों और अगरबत्तियों में वेस्ट मटेरियल, रबर का चूरा और दूसरी ऐसी चीजें इस्तेमाल होती हैं, जो सेहत और फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. लेकिन हमारी धूपबत्ती में गोबर, लकड़ी का ऑर्गेनिक चूरा, गुग्गुल और लोबान जैसी प्राकृतिक चीजें मिलाई जाती हैं. इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता, बल्कि वातावरण शुद्ध होता है और घर में एक पवित्र माहौल बनता है. इन प्रोडक्ट को बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता.
इतने रुपए के मिलते हैं प्रोडक्ट
गौशाला में काम करने वाले सदानंद बताते हैं कि मैं पिछले चार साल से यहां काम कर रहा हूं. हमारे बनाए हुए प्रोडक्ट को बाजार तक पहुंचाने के लिए फूल विक्रेताओं, मंदिरों और कॉरपोरेट कंपनियों से संपर्क करते हैं. हम लोगों से इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट इस्तेमाल करने की अपील करते हैं. गाय के गोबर से बनी हवन स्टिक का इस्तेमाल करने पर सामान्य हवन की तुलना में काफी कम धुआं निकलता है.
हमारे यहां हवन स्टिक का सिंगल पीस 500 रुपये और होलसेल में 400 रुपये का मिलता है. समरानी कप 60 रुपये और होलसेल में करीब 55 रुपये तक दिया जाता है. इन प्रोडक्ट की बिक्री से जो आय होती है, उससे बेसहारा गायों की देखभाल और दिव्यांग लोगों को रोजगार देने का काम किया जाता है.













