Last Updated:
Faridabad Ground Report : फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर में 26 जुलाई तक मकान खाली करने के नोटिस के बाद सैकड़ों परिवारों में डर का माहौल है. करीब 40 साल से रह रहे लोगों का कहना है कि वे पहले ही गंदगी, बदबू और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच जिंदगी जी रहे हैं. लोकल 18 से शीला कहती हैं कि मैं 20 साल से यहां रह रही हूं. नरक जैसी जिंदगी है. बच्चे बार-बार बीमार पड़ जाते हैं. रातभर मच्छर काटते हैं. अब सरकार हमारा ये आशियाना भी उजाड़ना चाहती है. ममता बताती हैं कि इतने साल से यहां रह रहे हैं. अब अचानक कहां जाएं. सरकार हमें रहने के लिए कहीं जगह तो दे.
फरीदाबाद. सोचिए अगर आपको घर तक पहुंचने के लिए रोज एक गहरे नाले के ऊपर रखी सिर्फ एक ईंट पर पैर रखकर जाना पड़े. जरा-सी चूक हुई तो सीधे गंदे पानी और गहरे गड्ढे में गिरने का डर हो. चारों तरफ बदबू, कूड़े के ढेर, मच्छरों का आतंक और गंदगी का अंबार हो. बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हों. बच्चों का खेलना तो दूर, घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाए. यही जिंदगी फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर में रहने वाले सैकड़ों परिवार सालों से जी रहे हैं. किसी ने झोपड़ी बनाई है तो किसी ने बड़ी मुश्किल से ईंट जोड़कर छोटा-सा मकान खड़ा किया है. कोई दिहाड़ी मजदूरी करता है, कोई लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा कर परिवार चलाता है तो कोई सफाई कर्मचारी है. मेहनत-मजदूरी करके किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाने वाले इन लोगों के सिर पर सबसे बड़ा डर मंडराने लगा है.
उजड़ने का डर इतना गहरा
प्रशासन ने 26 जुलाई तक जगह खाली करने का नोटिस दे दिया है. नोटिस के बाद पूरे इलाके में डर और चिंता का माहौल है. लोगों का कहना है कि अगर यह जगह खाली करनी है तो पहले रहने का इंतजाम किया जाए. उनका सवाल है कि आखिर इतने साल यहां रहने के बाद अब वे अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिवार को लेकर कहां जाएंगे. लोकल 18 से बातचीत में यहां रहने वाले लोगों ने अपना दर्द बताया. लोगों का कहना है कि वे पहले से ही बदहाल हालात में जिंदगी काट रहे हैं और अब नोटिस मिलने के बाद रातों की नींद भी उड़ गई है. लोगों का कहना है कि यहां करीब 30 से 40 साल से परिवार रह रहे हैं. लेकिन आज तक न तो बुनियादी सुविधाएं मिलीं और अब उजड़ने का डर अलग से सता रहा हैं.
हम कहां जाएंगे?
65 साल की सरोज बताती हैं कि मैं करीब 30 साल से यहां रह रही हूं. मेरे घर तक जाने का यही एक रास्ता है. सामने गहरा नाला है और एक ईंट के सहारे घर तक जाते हैं. चारों तरफ गंदगी फैली रहती है लेकिन कोई दूसरा रास्ता नहीं है. शीला कहती हैं कि मैं 20 साल से यहां रह रही हूं. नरक जैसी जिंदगी है. बच्चे बार-बार बीमार पड़ जाते हैं. हम दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. कोठियों में काम करते हैं और किसी तरह परिवार पाल रहे हैं. रातभर मच्छर काटते हैं. अब सरकार हमारा ये आशियाना भी उजाड़ना चाहती है. हम कहां जाएंगे?
अगर नहीं हटे तो जुर्माना
ममता बताती हैं कि मेरी शादी भी यहीं हुई और मैं आज भी इसी झुग्गी में रहती हूं. नोटिस में लिखा है कि अगर नहीं हटे तो जुर्माना भरना पड़ेगा. इतने साल से यहां रह रहे हैं. अब अचानक कहां जाएं. सरकार हमें रहने के लिए कहीं जगह तो दे. वोट (चुनाव) के समय नेता आते हैं, लेकिन अब कोई हमारी सुध लेने नहीं आ रहा. संगीता कहती हैं कि मैं पीछे से बलिया की रहने वाली हूं. शादी के बाद 25 साल पहले यहां आई थी. मजदूरी करके घर चलता है. दो छोटे बच्चे हैं. अब नोटिस मिलने के बाद सबसे बड़ी चिंता यही है कि आगे क्या होगा.
क्या बोले मंत्री कृष्णपाल गुर्जर
तिलक बताते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. उनका परिवार करीब 35 साल से शिव नगर में रह रहा है. किसी को पता भी नहीं चला और नोटिस लगा दिया गया. इस मकान को बनाने में करीब 4 लाख रुपये खर्च हुए हैं. मैं सफाई कर्मचारी हूं. अगर यहां से हटना पड़ा तो परिवार को लेकर कहां जाएंगे.यही सबसे बड़ी चिंता है. सेक्टर-22 के शिव नगर और मुजेसर के सैकड़ों लोग केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के कार्यालय गए थे. लोगों ने मांग की अगर प्रशासन मकान खाली कराना चाहता है तो पहले रहने के लिए दूसरी जगह दी जाए. लोगों का कहना है कि बिना पुनर्वास के घर तोड़ना सही नहीं होगा. मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने लोगों की बात सुनी और अधिकारियों से बातचीत कर उचित समाधान निकालने का भरोसा दिया.
About the Author

प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें












