Last Updated:
Faridabad News: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के दुनियाभर में लाखों भक्त हैं. उन्हीं में से एक जॉर्डन का एक अनोखा भक्त है, जो प्रेमानंद महाराज को अपना गुरु मानता है और गुरु की अच्छी सेहत के लिए शख्स जॉर्डन से भारत आ गया और गुरु की सेहत ठीक होने की मन्नत लेकर दंडवत कांवड़ यात्रा पर निकल गया है.
फरीदाबाद: भगवान और गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा इंसान से क्या कुछ नहीं करवा सकती. इसकी मिसाल फरीदाबाद के सरूरपुर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय रमन दे रहे हैं, जहां लोग बेहतर कमाई के लिए विदेशों का रुख करते हैं. वहीं रमन ने जॉर्डन में मिल रही अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और अब हरिद्वार से दंडवत कांवड़ यात्रा करते हुए वृंदावन जा रहे हैं. उनके हाथ में चार लीटर गंगाजल है और मन में सिर्फ एक ही कामना है कि प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ हों. इसी इच्छा के साथ रमन कठिन रास्ता तय करते हुए वृंदावन पहुंचना चाहते हैं, ताकि वहां गंगाजल से प्रेमानंद महाराज का स्नान करा सकें.
दंडवत कांवड़ यात्रा सामान्य कांवड़ यात्रा से कहीं ज्यादा कठिन होती है. इसमें हर कुछ कदम चलने के बाद पूरी तरह जमीन पर लेटना पड़ता है, फिर वहीं से उठकर दोबारा आगे बढ़ना होता है. इस कठिन सफर में रमन अकेले नहीं हैं. उनके साथ उनके दो भाई और तीन दोस्त भी लगातार चल रहे हैं. पूरी यात्रा के दौरान यही लोग उनके खाने-पीने, आराम और गंगाजल की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे हैं, ताकि उनका संकल्प बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके.
जॉर्डन की नौकरी छोड़ गुरु के लिए आए भारत
रमन ने बताया कि मैं करीब पांच साल तक जॉर्डन की एक एक्सपोर्ट कंपनी में को-ऑर्डिनेटर के तौर पर काम करता था. करीब 45 हजार रुपये महीने की सैलरी मिलती थी. नौकरी अच्छी थी और जिंदगी भी आराम से चल रही थी. लेकिन करीब तीन साल पहले प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनना शुरू किया. धीरे-धीरे मेरी श्रद्धा इतनी बढ़ गई कि मुझे प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के बारे में पता चला. मैंने मन ही मन एक संकल्प ले लिया. फिर मैंने नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया. दंडवत कांवड़ यात्रा करके अब वह अपने गुरु के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करेंगे. रमन बताते हैं कि मैंने यह यात्रा 22 जुलाई से शुरू की थी.
पहली बार कर रहे दंडवत कांवड़ यात्रा
रमन बताते हैं कि मैं इससे पहले 12 बार हरिद्वार से कांवड़ ला चुका हूं. लेकिन दंडवत कांवड़ यात्रा पहली बार कर रहा हूं. इस बार मैंने अपने लिए कुछ नहीं मांगा है. सिर्फ एक ही प्रार्थना है कि प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ हों और हमेशा अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते रहें. रमन बताते हैं कि अगर श्रद्धा सच्ची हो और मन साफ हो तो भगवान हर प्रार्थना जरूर सुनते हैं. यही विश्वास मुझे हर दिन आगे बढ़ने की ताकत दे रहा है.
ट्रैफिक समस्याओं का करना पड़ा सामना
रमन बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन की ओर से कांवड़ियों के लिए काफी अच्छी व्यवस्था देखने को मिली. रास्ते में सुरक्षा, ट्रैफिक और दूसरी सुविधाएं बेहतर थीं, जिससे यात्रा करने में आसानी हुई. वहीं फरीदाबाद पहुंचने के बाद भारी ट्रैफिक की वजह से कई जगह लंबे जाम का सामना करना पड़ा. दंडवत यात्रा होने के कारण आगे बढ़ना और भी मुश्किल हो गया. चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, वह हर हाल में वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद महाराज के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ अपनी दंडवत कांवड़ यात्रा पूरी करूंगा.
About the Author

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
और पढ़ें











