जल चढ़ाने से खत्म होता रोग…अंबाला का ये ऐसा शिवालय, 150 साल से भोलेनाथ की भक्ति में लीन

On: August 21, 2026 8:44 PM
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Para Shivling Ambala : अनाज मंडी का ये मंदिर अंबाला की पहचान बन चुका है. इस मंदिर का इतिहास करीब 150 साल से भी अधिक पुराना है. लोकल 18 से मंदिर के पुजारी हिमांशु शास्त्री बताते हैं कि समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता गया और श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई. इस पारा शिवलिंग पर जल चढ़ाने से रोग और परेशानियां दूर होती हैं. सावन का महीना आते ही मंदिर में भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है. मंदिर की पहचान यहां स्थापित 306 किलो के पारा शिवलिंग से भी है. स्थानीय लोगों के लिए यह शिवालय केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का केंद्र है.

अंबाला. हरियाणा के अंबाला जिले की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों और सैन्य छावनी से नहीं है, बल्कि यहां कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल भी हैं, जिनसे वर्षों पुरानी आस्था और परंपराएं जुड़ी हुई हैं. अंबाला छावनी की अनाज मंडी में स्थित सत्संग सभा शिवाला मंदिर भी ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है. कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 150 साल से भी अधिक पुराना है. समय के साथ मंदिर का स्वरूप भले बदलता गया, लेकिन भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है. मंदिर की सबसे पुरानी पहचान यहां स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग से जुड़ी है. यह शिवलिंग 150 साल से भी पहले का बताया जाता है.

हरिद्वार से आते कांवड़िए

लोकल 18 से मंदिर के पुजारी हिमांशु शास्त्री बताते हैं कि शुरुआती दौर में यहां भगवान शिव का ही मंदिर था. इसी में करीब 150 वर्ष से अधिक पुराना नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित था. लेकिन समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता गया और श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई. स्थानीय लोगों के लिए यह शिवालय केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का केंद्र है. महाशिवरात्रि पर कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचते हैं.

उत्तर भारत का एकमात्र

पुजारी हिमांशु शास्त्री बताते हैं कि मंदिर की खास पहचान अब यहां स्थापित 306 किलो के पारा शिवलिंग से भी है. इस पारा शिवलिंग को कुछ वर्ष पहले मंदिर में स्थापित किया गया. इसे उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा पारा शिवलिंग माना जाता है, जिसके दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस पारा शिवलिंग पर जल चढ़ाने से रोग और परेशानियां दूर होती हैं. सावन का महीना आते ही मंदिर में भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है.

निकाली जाती है पालकी

पुजारी हिमांशु शास्त्री के अनुसार पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु यहां माथा टेकने पहुंचते हैं. कोई भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि मांगता है तो कोई अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचता है. मंदिर में धार्मिक आयोजनों की परंपरा भी काफी खास है. जन्माष्टमी के दिन भगवान भोलेनाथ के पारा शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इसके दो-तीन दिन बाद यहां फूलडोल मेले का आयोजन होता है. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की पालकी पूरे बाजार में निकाली जाती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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