‘हालात अच्छे नहीं’, 10 साल पहले कंडम घोषित बिल्डिंग में चल रहा फरीदाबाद का ये कॉलेज

On: September 9, 2026 7:58 PM
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Ground Report Faridabad : फरीदाबाद के पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग को 2016 में कंडम घोषित किया जा चुका है, फिर भी यहां पढ़ाई जारी है. दिल्ली की घटना के बाद छात्रों ने सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन किया. नई छह मंजिला बिल्डिंग का करीब 90% काम पूरा हो चुका है, लेकिन शिफ्टिंग अब तक नहीं हुई. सात हजार विद्यार्थियों वाले इस सरकारी कॉलेज की पहचान शहर के बड़े शिक्षण संस्थानों में है. यहां से कई मंत्री और उद्योगपति पढ़कर निकले हैं. लोकल 18 से छात्र राहुल ने बताया कि पुरानी बिल्डिंग के अंदर हालात अच्छे नहीं हैं. रवि कहते हैं कि शौचालयों में सफाई को लेकर भी दिक्कत है.

फरीदाबाद. दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने और छात्रों की मौत के बाद फरीदाबाद के पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. सेक्टर-16 स्थित इस कॉलेज की बिल्डिंग करीब 50 साल पुरानी है और साल 2016 में लोक निर्माण विभाग की तरफ से कंडम घोषित की जा चुकी है. इसके बावजूद पुराने भवन में पढ़ाई चल रही है. सोमवार को सैकड़ों छात्र मुख्य गेट पर पहुंचे और एमडीयू, जिला प्रशासन तथा कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया. करीब सात हजार विद्यार्थियों वाले इस सरकारी कॉलेज की पहचान शहर के बड़े शिक्षण संस्थानों में है. यहां से कई मंत्री और उद्योगपति पढ़कर निकले हैं, लेकिन मौजूदा हालात छात्रों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. लोक निर्माण विभाग ने साल 2019 में छह मंजिला इमारत का निर्माण शुरू कराया था. कोरोना महामारी के दौरान काम प्रभावित हुआ और बाद में बजट की कमी से रफ्तार धीमी पड़ गई. राशि में दो बार बढ़ोतरी की गई, लेकिन निर्माण में देरी के चलते पहली कंपनी ने काम आगे बढ़ाने से मना कर दिया. इसके बाद परियोजना दोबारा अटक गई.

पानी की व्यवस्था खराब

राहुल ने लोकल 18 से बताया कि मैं ग्रेजुएशन के फर्स्ट ईयर में हूं. पुरानी बिल्डिंग के अंदर हालात अच्छे नहीं हैं. पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और टॉयलेट की सुविधा भी परेशान करने वाली है. पीने का पानी नहीं मिलने पर बाहर से बोतल खरीदनी पड़ती है. कई खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं. नई इमारत तैयार होने के बावजूद कक्षाओं को वहां नहीं भेजा गया है.

कोई बड़ी दिक्कत नहीं

रवि ने बताया कि मैं बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ता हूं. जिस कमरे में मेरी क्लास लगती है, वहां फिलहाल कोई बड़ी दिक्कत नहीं है. बाहर का हिस्सा पुराना जरूर दिखाई देता है, लेकिन अंदर वाले कक्ष में बैठकर पढ़ाई हो रही है. पानी की सप्लाई रुकने पर विद्यार्थियों को बाहर से पानी लेना पड़ता है. कॉलेज के शौचालयों में साफ-सफाई को लेकर भी दिक्कत है. गंदगी के साथ दुर्गंध रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का डर बना रहता है. गर्मी के समय बिजली बैकअप नहीं होने से पंखे बंद होने की स्थिति में पढ़ना मुश्किल हो जाता है. पुरानी दीवारों पर प्लास्टर उखड़ा हुआ है और कई जगह लोहे के सरिए नजर आते हैं.

छह महीने और लगेंगे

बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र साहिल मौर्य ने बताया कि जिस कमरे में मैं बैठता हूं, वह ज्यादा जर्जर नहीं है, लेकिन बिल्डिंग पुरानी और जर्जर जरूर है. पीछे नई बिल्डिंग बन रही है. उम्मीद है कि करीब छह महीने में वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा. शैलेश्वर कौशिक ने लोकल 18 को फोन पर बताया कि नई बिल्डिंग का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. बाकी कार्य पूरा होते ही विद्यार्थियों को नए परिसर में भेज दिया जाएगा. फिलहाल पढ़ाई के लिए सुरक्षित कमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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