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Sadabahar flower harm : सदाबहार का पौधा कहीं भी आसानी से मिल जाता है. आसानी से मिलने की वजह से अक्सर लोग इसकी उपयोगिता को नजरअंदाज कर देते हैं. लोकल 18 से अंबाला के आयुष चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि सदाबहार की पत्तियों और फूलों में मौजूद कुछ सक्रिय तत्व इंसुलिन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से इसे ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. डॉ. जितेंद्र के मुताबिक, सदाबहार को अंग्रेजी में पेरीविंकल कहा जाता है. इसके फूल और पत्तियों में एल्कलॉइड जैसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं. बीपी की दवा लेने वाले मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह इसका सेवन न करें. इसके सक्रिय तत्व दवाओं के असर को कम कर सकते हैं.
घरों और बगीचों में खूबसूरती बढ़ाने वाला सदाबहार का पौधा सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं है. इसके फूल और पत्तियों का पारंपरिक चिकित्सा में कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपयोग किया जाता है. आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि इसके औषधीय उपयोग के साथ सही मात्रा और सावधानी भी जरूरी है. आयुर्वेद में इसके कई फायदे भी बताए गए हैं.
सदाबहार को अंग्रेजी में पेरीविंकल कहा जाता है. इसके फूल और पत्तियों में एल्कलॉइड्स जैसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जिनका औषधीय उपयोग किया जाता है. पारंपरिक रूप से इसे मधुमेह, ब्लड प्रेशर और दूसरी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है. हालांकि, इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि सदाबहार की पत्तियों और फूलों में मौजूद कुछ सक्रिय तत्व इंसुलिन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से इसे ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है, लेकिन मधुमेह के मरीज ध्यान रखें कि सदाबहार किसी भी निर्धारित दवा का विकल्प नहीं है और बिना सलाह सेवन नुकसानदेह हो सकता है.
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डॉ. जितेंद्र वर्मा के मुताबिक, सदाबहार की पत्तियों या जड़ का सीमित उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में उच्च रक्तचाप के लिए बताया जाता है. बीपी की दवा लेने वाले मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह इसका सेवन न करें. इसके सक्रिय तत्व दवाओं के असर को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है.
सदाबहार की पत्तियों का काढ़ा या रस रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है. माना जाता है कि इसमें मौजूद तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इम्यूनिटी के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या भी बेहद जरूरी है. इन सभी को मिलाकर ही इम्युनिटी पावर बढ़ती है.
डॉ. जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि खुजली, कील-मुंहासे, फोड़े-फुंसियों या कीट के काटने पर सदाबहार की पत्तियों का ताजा रस या लेप लगाने का पारंपर रही है. लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए लगाने से पहले छोटे हिस्से पर जांच करें और जलन या एलर्जी होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें.
डॉ. जितेंद्र वर्मा के मुताबिक, गले की खराश और सूजन में सदाबहार के पत्तों को पानी में उबालकर गरारे करने की बात कही जाती है. इससे कुछ लोगों को अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन लगातार दर्द, तेज बुखार, निगलने में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत होने पर घरेलू उपायों के बजाय डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.
डॉ. जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि सदाबहार का सेवन आमतौर पर सुबह करने की बात कही जाती है, लेकिन इसकी कोई सार्वभौमिक सुरक्षित मात्रा तय नहीं है. अधिक मात्रा या लंबे समय तक सेवन नुकसानदेह हो सकता है. गर्भवती महिलाएं, बच्चे और गंभीर बीमारी से पीड़ित बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका उपयोग न करें. घरेलू नुस्खे के आधार पर इसका उपयोग सुबह के समय किया जा सकता है.












