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पंचकूला के स्कूल में KG की बच्ची पर तीसरी कक्षा के छात्र के हमले ने सभी को झकझोर दिया है. आखिर इतनी छोटी उम्र में बच्चों के अंदर हिंसक व्यवहार क्यों बढ़ रहा है? घर का माहौल, मोबाइल पर हिंसक कंटेंट और गलत संगत बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है.
फरीदाबाद: बच्चों को छोटी उम्र से ही अच्छे संस्कार और सही-गलत की समझ सिखाई जाती है, लेकिन अगर यही बच्चे छोटी उम्र में हिंसक व्यवहार करने लगें तो यह माता-पिता के लिए चिंता का विषय है. हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक स्कूल में KG की छात्रा पर तीसरी कक्षा के छात्र के हमले की घटना ने सभी को झकझोर दिया है. आरोप है कि छात्र ने बच्ची का सिर बेंच पर मारा, उसके चेहरे पर कई बार लात-घूंसे मारे और बाल पकड़कर घसीटा. इसके बाद ईंट से भी उसके सिर पर हमला किया. घायल बच्ची को पहले सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया. इस घटना के बाद स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
बच्चों में हिंसक व्यवहार के पीछे क्या हैं कारण
इस मामले को लेकर Local18 ने फरीदाबाद के मनोचिकित्सक सर्जन कमोडोर डॉ. सुनील गोयल से बातचीत की. उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र में बच्चे के अंदर इस तरह का गुस्सा और हिंसक व्यवहार होना चिंता की बात है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. अगर बच्चे को घर में मारपीट का सामना करना पड़ता है या वह माता-पिता के बीच हिंसा देखता है तो उसके मन में यह बात बैठ सकती है कि गुस्सा आने पर मारपीट करना सामान्य है. इसी तरह स्कूल में बड़े बच्चों की तरफ से परेशान किए जाने पर भी बच्चा अपना गुस्सा छोटे बच्चों पर निकाल सकता है.
डॉ. सुनील गोयल बताते हैं कि आजकल मोबाइल पर रील, फिल्मों और सीरियल में दिखाई जाने वाली हिंसक सामग्री का भी बच्चों पर असर पड़ सकता है. कई बार उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझ नहीं आता और वे ऐसी चीजों को सामान्य व्यवहार मानने लगते हैं.
बच्चों के गुस्से को नजरअंदाज न करें माता-पिता
डॉ. सुनील गोयल बताते हैं कि बच्चों में हिंसक व्यवहार अचानक पैदा नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है. माता-पिता को ध्यान देना चाहिए कि बच्चा गुस्से में चीजें फेंकता है, धक्का देता है या परिवार के किसी सदस्य पर हाथ उठाता है तो इसे सामान्य शरारत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह उसके व्यवहार में आ रहे बदलाव का संकेत हो सकता है.
मारपीट का जवाब मारपीट से देना सही नहीं
डॉ. सुनील गोयल बताते हैं कि अगर बच्चा माता-पिता या भाई-बहन के साथ मारपीट करता है तो परिवार को स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए कि ऐसा व्यवहार बिल्कुल स्वीकार नहीं है. इसके लिए घर में कुछ सीमाएं तय करना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर बच्चे का खेल का समय कम किया जा सकता है, कुछ दिनों के लिए मोबाइल लिया जा सकता है या उसकी पसंदीदा गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है. हालांकि, बच्चे की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं देना चाहिए. माता-पिता को प्यार के साथ सख्ती दिखाते हुए उसे समझाना होगा कि गुस्सा आने पर भी किसी को मारना सही नहीं है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…









