अंबाला. बच्चों का कमरा केवल उनके खेलने और सोने की जगह नहीं होता, बल्कि यही वह स्थान होता है जहां उनका मानसिक, भावनात्मक और रचनात्मक विकास भी होता है. माता-पिता अक्सर बच्चों के कमरे को रंग-बिरंगे खिलौनों, आकर्षक पेंटिंग्स और खूबसूरत सजावटी सामान से सजाते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, केवल सुंदर सजावट ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि कमरे में रखी जाने वाली हर वस्तु का बच्चों के मन, व्यवहार और वातावरण पर प्रभाव पड़ता है. इसलिए बच्चों का कमरा तैयार करते समय कुछ खास वास्तु नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि बच्चों के कमरे में सबसे पहले टूटे हुए खिलौनों को जगह नहीं देनी चाहिए. बच्चे खेलते समय खिलौने तोड़ देते हैं और कई बार वे लंबे समय तक कमरे में ही पड़े रहते हैं. वास्तु शास्त्र में टूटे हुए सामान को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.
न रखें कांटेदार पौधे
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी के मुताबिक, ऐसे खिलौने बच्चों के मन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. कमरे का सकारात्मक वातावरण प्रभावित हो सकता है. इसलिए समय-समय पर टूटे हुए खिलौनों को हटाकर नए या सही अवस्था वाले खिलौने ही रखने चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बच्चों के कमरे में कांटेदार पौधे या नुकीले पत्तों वाले पौधे भी नहीं रखने चाहिए. ऐसे पौधे न केवल बच्चों के लिए शारीरिक रूप से नुकसानदायक हो सकते हैं, बल्कि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का कारण भी माना जाता है. कमरे में प्राकृतिक हरियाली रखनी हो तो मुलायम पत्तों वाले छोटे और सुरक्षित पौधों का चयन करें.
बिखरा कमरा खतरनाक
पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, छोटे बच्चों के कमरे में भारी और बड़े आकार का फर्नीचर लगाने से भी बचना चाहिए. भारी फर्नीचर बच्चों के खेलने की जगह कम कर देता है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ा सकता है. हल्का, सुरक्षित और कम जगह घेरने वाला फर्नीचर अधिक उपयुक्त है. वास्तु शास्त्र में साफ-सफाई और व्यवस्थित वातावरण को विशेष महत्व दिया गया है. बच्चों का कमरा अगर बिखरा हुआ और अव्यवस्थित रहेगा तो इससे न केवल पढ़ाई और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का भी संचार है. माता-पिता को बच्चों को शुरू से ही अपने कमरे और सामान को व्यवस्थित रखने की आदत सिखानी चाहिए.
दहाड़ते शेर की तस्वीर न लगाएं
पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि बच्चों के कमरे में डरावनी, हिंसक या विनाश दर्शाने वाली पेंटिंग्स नहीं लगानी चाहिए. इसमें दहाड़ते शेर या अन्य खूंखार जानवरों की तस्वीरें, युद्ध या विनाश के दृश्य, रोती हुई महिला की तस्वीर, चील या कौवे की फोटो बच्चों के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर सकती हैं. इसी तरह, क्रोधित स्वरूप में बड़ी आकार की मां काली की तस्वीर भी बच्चों के कमरे में लगाने से बचना चाहिए.
बच्चों के कमरे में प्रकृति, फूल, पक्षी, इंद्रधनुष, मुस्कुराते बच्चों, प्रेरणादायक चित्रों या शिक्षा से जुड़े पोस्टर लगाना अधिक सकारात्मक माना जाता है. पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि बच्चों का कमरा ऐसा होना चाहिए जहां उन्हें सुरक्षा, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो. सही सजावट, स्वच्छ वातावरण और सकारात्मक चित्र बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. .












