
गत दिवस हुई मुसलाधार बारिश से महल का एक हिस्सा गिरने से चर्चा में आया महल
Rajaji Mahal Jagadhri (मेरा हरियाणा), यमुनानगर : कभी शाही आन बान का गवाह रहा जगाधरी का करीब 250 साल पुराना राजा जी महल आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। हालात यह हैं कि यह महल अब लगभग खंड्हर का रूप धारण कर चुका है। खस्ताहाल इमारत से कभी भी बड़ा हादसा होने का डर हमेशा बना रहता है।
आपको बता दें कि जगाधरी स्थित राजा जी महल का सीधा संबंध दयालगढ़ जगीर से है। दयालगढ़ जागीर का साल 1829 में अंग्रेजी शासन में विलय हुआ था। मौजूदा जगाधरी इसी जागीर का हिस्सा था। अंग्रेजों ने पहले दयालगढ़ रियासत को लैप्स कर सीधे अपने कंट्रोल में ले लिया था। बाद में जगाधरी की विरासत लाला बंसीलाल के परिवार को सौंपी थी। उनके बाद लाला बैनी प्रसाद ने विरासत संभाली।
इस तरह पड़ा राजा जी महल नाम
इसके बाद अंग्रेजों ने उद्योगपति लाला बंसीलाल के बेटे ज्योति प्रसाद को 1905 में राजा की उपाधि दी। इस उपाधि के साथ ही इस महल का नाम भी राजा जी महल पड़ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार राजा जी के महल के वंशज ब्रह्मप्रकाश अभी भी यहां रहते हैं। हालांकि इस महल का उचित रखरखाव अब नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते यह जगह-जगह से कमजोर पड़ चुका है।
सरकारों ने नहीं की संरक्षित करने की कोशिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह महल भारतीय इतिहास की एक जीवंत उदाहरण है। इसका इतिहास सदियों पुराना है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद न तो इसके मालिकों ने इसका ज्यादा रखरखाव किया और न ही अभी तक किसी भी सरकार ने इस इमारत को संरक्षित करने की कोशिश की। जिससे इसके वजूद को बचाया जा सकता।
वर्तमान में यह हो चुकी है स्थिति
यमुनानगर के जगाधरी स्थित 250 साल पुराना राजा जी महल अत्यधिक पुराना होने, बारिश के कारण दीवारों में नमी आने और लंबे समय से उचित रखरखाव न होने के कारण जर्जर हो चुका है, जिसके चलते इसके हिस्से अब भरभराकर गिर रहे हैं। नमी के चलते इसकी सामग्री और दीवारें समय के साथ बेहद कमजोर हो चुकी हैं। मानसून की बारिश के कारण पुरानी और कमजोर दीवारों में लगातार नमी बढ़ रही है, जिससे इसके ढहने का खतरा और अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही महल के आसपास घनी आबादी और संकरी गलियां हैं, तथा पुरानी संरचना कमजोर होने के कारण यह बोझ और मौसम की मार नहीं झेल पा रही है।







