अंबाला में रक्षाबंधन के मौके पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने त्योहार की खुशियों के बीच कई भावुक पल भी सामने ला दिए. दरअसल, ऑब्जर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों की कलाई पर जब राखी बांधी गई तो किसी के चेहरे पर मुस्कान आई, तो किसी को अपने घर और बहनों की याद सताने लगी. अपनों से दूर इन बच्चों के लिए राखी का ये धागा सिर्फ एक त्योहार की रस्म नहीं, बल्कि इस बात का एहसास था कि समाज में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो उन्हें अपना समझकर उनके साथ खुशियां बांटने पहुंचे हैं.
अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम में मनाया गया रक्षाबंधन
बता दें कि अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम में रक्षाबंधन का त्योहार इस बार कुछ अलग अंदाज में मनाया गया. इस दौरान कलाधारा ग्रुप और ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं. खासतौर पर कार्यक्रम के दौरान बच्चों के माथे पर तिलक लगाया गया, उनकी कलाई पर राखी बांधी गई और मिठाई खिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई.
राखी बंधी तो बच्चों की आंखों में दिखी घर की याद
लेकिन इस आयोजन का सबसे भावुक पहलू वह था, जब बच्चों की कलाई पर राखी बांधने की शुरुआत हुई. कई बच्चे अपनी कलाई पर बंधी राखी को कुछ देर तक देखते रहे. कुछ के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उनकी आंखें जैसे अपने घर और परिवार को तलाश रही थीं.
रक्षाबंधन ऐसा त्योहार है, जब भाई अपनी बहनों से राखी बंधवाने के लिए घर पहुंचते हैं, लेकिन इन बच्चों में कई ऐसे हैं, जो इस दिन अपनी बहनों और परिवार से दूर हैं. ऐसे में समाजसेवियों और संस्था के सदस्यों ने उनकी सूनी कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रिश्तों की गर्माहट देने की कोशिश की.
बच्चों को अच्छा रास्ता अपनाने का दिलाया संकल्प
वहीं, इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए कलाधारा ग्रुप की सदस्य मानसी ने बताया कि इस आयोजन का मकसद सिर्फ त्योहार मनाना नहीं था, बल्कि बच्चों को एक नई और सकारात्मक राह दिखाने की कोशिश भी की गई है.
उन्होंने कहा कि बच्चों की कलाई पर राखी बांधने के बाद उनसे एक खास वादा लिया गया. उनसे कहा गया कि जब वे ऑब्जर्वेशन होम से बाहर जाएं तो दोबारा किसी गलत या बुरे काम का हिस्सा न बनें और समाज व देशहित में अच्छे कार्य करें.
राखी से बच्चों को मिला भरोसे और अपनापन का संदेश
वहीं, मानसी ने कहा कि कई बार यहां रहने वाले बच्चे अपनी बहनों से नहीं मिल पाते. इसलिए रक्षाबंधन के दिन उनकी कलाई पर राखी बांधकर उन्हें भाई-बहन के रिश्ते के प्यार का एहसास कराने का प्रयास किया गया. उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए यह राखी सिर्फ धागा नहीं, बल्कि भरोसे और अपनापन का संदेश है.
60 बच्चों की कलाई पर बांधी गई राखी
वहीं, कलाधारा ग्रुप के सदस्य करन ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान करीब 60 बच्चों की कलाई पर राखी बांधी गई है. उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हर परिवार में खुशियों का त्योहार होता है और इसी खुशी को उन बच्चों के साथ साझा करने के लिए वे ऑब्जर्वेशन होम पहुंचे. बच्चों के साथ त्योहार मनाकर उन्हें भी काफी अच्छा लगा.
समाज के साथ जुड़ाव का दिया संदेश
वहीं, समाजसेवी विशाल वर्मा ने कहा कि त्योहार हर किसी के लिए होते हैं. ऐसे बच्चों को भी त्योहार की खुशियों में शामिल करना समाज की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए बच्चों को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि समाज उनके साथ खड़ा है और उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर मिलना चाहिए.
बच्चों को समाज से अलग न समझने का संदेश
वहीं, सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रंजीता मेहता ने कहा कि ऑब्जर्वेशन होम में बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाना एक अच्छी पहल है. इससे बच्चों को यह महसूस हुआ कि लोग उनके साथ हैं और उन्हें समाज से अलग नहीं समझा जाता.
उन्होंने बताया कि लड़कियों ने बच्चों को बेहद प्यार से राखी बांधी, जिससे बच्चों में भी सकारात्मक भावना पैदा हुई. उन्होंने कहा कि ऑब्जर्वेशन होम में समय-समय पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और विभिन्न त्योहार बच्चों के साथ मिलकर मनाए जाते हैं, ताकि उन्हें समाज और परिवार से जुड़े होने का एहसास हो.
उन्होंने कहा कि इस दौरान ग्रुप के सदस्यों ने ऑब्जर्वेशन होम के स्टाफ को भी राखी बांधी और उन्हें भी काफी अच्छा लग रहा है.













