फरीदाबाद: नौकरी करते समय कई बार कर्मचारी ऐसी स्थिति में फंस जाता है, जब उसे अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है, वेतन रोक दिया जाता है या नौकरी छोड़ने के बाद भी कंपनी उसका बकाया पैसा नहीं देती. ऐसे में कर्मचारी को समझ नहीं आता कि आखिर वह क्या करे और अपने हक के लिए कहां जाए. इसी तरह नियुक्ति पत्र नहीं मिलने या काम के दौरान दुर्घटना होने पर भी कई लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती. ऐसे ही जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए Local18 ने बात की एडवोकेट वंदना सिंह से.
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने से पहले कंपनी को नियमों के मुताबिक नोटिस देना जरूरी होता है. अगर कंपनी किसी कर्मचारी की सेवाएं खत्म करना चाहती है तो अचानक नौकरी से निकालना सही प्रक्रिया नहीं है. कर्मचारी को नोटिस या उसके बदले नोटिस अवधि का भुगतान, लागू नियमों और उसकी नौकरी की शर्तों के अनुसार मिलना चाहिए. हालांकि, यह बात कर्मचारी की नौकरी, कंपनी के नियम और लागू श्रम कानून पर भी निर्भर करती है.
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि नौकरी छोड़ने या नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारी का पूरा हिसाब-किताब किया जाना चाहिए. इसमें आखिरी तारीख तक का वेतन, बाकी भुगतान, लागू छुट्टियों का पैसा और दूसरी बकाया राशि शामिल हो सकती है. इसे आम भाषा में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कहा जाता हैं. यानी कर्मचारी ने जितने दिन काम किया है, उसका पैसा और जो भी वैध बकाया बनता है, वह कंपनी को नियमों के अनुसार देना होता है.
दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि अगर कंपनी कर्मचारी का वेतन या कोई बकाया राशि रोक लेती है तो कर्मचारी अपने हक के लिए शिकायत कर सकता है. फरीदाबाद में श्रम विभाग और संबंधित श्रम न्यायालय के माध्यम से मामले को उठाया जा सकता है. शिकायत के समय कर्मचारी के पास जितने दस्तावेज और सबूत हों, उन्हें संभालकर रखना बहुत जरूरी है. इसमें नियुक्ति पत्र, वेतन की जानकारी, बैंक स्टेटमेंट, पीएफ, ईएसआई, कंपनी की आईडी और काम से जुड़े दूसरे रिकॉर्ड मददगार हो सकते हैं.
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि अगर किसी कर्मचारी को नियुक्ति पत्र नहीं मिला है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके सारे अधिकार खत्म हो गए. अगर कर्मचारी कंपनी में काम कर रहा है और उसकी अटेंडेंस लग रही है, पंचिंग हो रही है या उसके पास नौकरी से जुड़े दूसरे सबूत हैं तो वह अपने रोजगार को साबित कर सकता है. इसलिए नियुक्ति पत्र नहीं मिलने की वजह से कर्मचारी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि उसके कोई अधिकार नहीं हैं.
दुर्घटना होने पर मुआवजा मिलना आवश्यक
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि काम के दौरान कर्मचारी के साथ दुर्घटना हो जाती है तो परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार उसे मुआवजे का अधिकार हो सकता है. अगर दुर्घटना के बाद कंपनी कर्मचारी की मदद नहीं करती या मिलने वाला मुआवजा नहीं देती है तो कर्मचारी संबंधित श्रम प्राधिकरण या न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है. ऐसे मामलों में मेडिकल रिकॉर्ड, दुर्घटना की जानकारी, कंपनी में काम करने के सबूत और दूसरे जरूरी दस्तावेज संभालकर रखना चाहिए. पात्रता बनने पर कर्मचारी को मुआवजे के साथ ब्याज भी मिल सकता है.
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि कर्मचारी को अपने अधिकारों की जानकारी होना सबसे जरूरी है. नौकरी करते समय वेतन, अटेंडेंस, पीएफ, ईएसआई और कंपनी से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का रिकॉर्ड अपने पास रखना चाहिए. अगर कंपनी नियमों के खिलाफ काम करती है तो कर्मचारी डरने के बजाय संबंधित विभाग या न्यायालय में शिकायत कर सकता है.










